वर्तमान में किसान आंदोलन पूरे देश में बहुत चर्चा में है।  उस समय दिल्ली के अंदर किसान आंदोलन में शामिल हुए किसानों की बेटियां उनके बेटों से कम नहीं हैं।  स्कूली उम्र में बेटियां अब खेती के साथ-साथ घर का काम भी कर रही हैं।

कड़कड़ाती ठंड में जहां एक तरफ किसान दिल्ली के अंदर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी कई बेटियां फावड़े और फावड़े से खेतों की जुताई करते हुए नजर आ रही हैं।  यह उसका शौक नहीं है लेकिन अब वह मजबूर है।
जहां इन बेटियों के पिता नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली के अंदर किसान आंदोलन में शामिल हो गए हैं, वहीं बेटियों ने अपने खेतों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि को बचाया है। सिर्फ बेटे ही नहीं बल्कि बेटियां भी इस जिम्मेदारी में शामिल हैं।
फतेहाबाद के एक गाँव की बेटियाँ खेत पर काम करने के लिए फावड़े और फावड़े लेकर पहुँचीं।  उन बेटियों के परिवार आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।  जिन बेटियों को खेत में जरूरत थी, उन्होंने खेत की सिंचाई करने के लिए खाई भी बनवाई और गेहूं की फसल के अंदर खाद भी डाली।
इन किसान बेटियों का कहना है कि उनके पिता खेत में भोजन उगाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, जिससे उन्हें खेती करने के लिए पर्याप्त शक्ति मिलती है।

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